कबाहु कियो न भजनवा कैसे बीतेगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कबहु कियो ना भजन वा कैसे बीतेगी,

जइयो यम के जब भवनवा कैसे बीतेगी,

कबहु कियो ,,,,,

सह ना सक्यो जब कष्ट गर्भ के किये कौल करार,

प्रभु तुम्हारा भजन करूंगा करो नर्क से पार,

वायदा भूलो रे बेईमनवा कैसे बीतेगी,

कबहु कियो ,,,,,

बालापन हंस खेल गवायो आई मस्त जवानी,

मात पिता ने करी सगाई दूल्हा बन्यो गुमानी,

बंद गयो हाथों में कंगनवा कैसे बीतेगी,

कबहु कियो ,,,,,

धूमधाम से ब्याह रचाया पहर केसरी जामा,

दुल्हन लेकर घर को आए खत्म हुआ सब ड्रामा,

बन गए सजनी के सजनवा कैसे बीतेगी,

कबहु कियो ,,,,,

विषयों का विष पी पी करके दिन दिन हुए दीवाने,

बालक थे फिर बाप का कहाये बाबा लगे कहाने,

आय गयो तेरो चौथो पनवा कैसे बीतेगी,

कबहु कियो ,,,,,

कमर कमान दांत सब टूटे नजर गई नजराने,

खाट बिछाय द्वार पर पड़ गए बहुएं मारे ताने,

कब ये मरेगो भुड़नवा कैसे बीतेगी,

कबहु कियो ,,,,,

अब भी सोच समझ ले मूर्ख कहता मेरा मेरा,

राम भजन के बिना ना तेरा होगा नर निवेरा,

अब भी कर ले कुछ जतनवा कैसे बीतेगी,

कबहु कियो ,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।