है इक फकीरा शिरडी में

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बड़ी निराली महिमा जिस की जिसके खेल निराले,

है इक फकीरा शिरडी में,

छोड़ चुके हो जिसको सारे वो उसको अपनाता है,

उस के मन में दया बड़ी है सब को गले लगाता है,

चरण में आये सब भगतो को जो बचो सा पा ले,

है इक फकीरा शिरडी में,

मीठी मीठी वाणी उसकी प्रेम का पाठ पड़ता है,

कर देता वो निर्मल मन को कोई ईर्षा वैर मुकाता है,

सब को सच्ची राह दिखा के कर्म काट ता काले,

है इक फकीरा शिरडी में,

सागर उस के दर पे जा के जो भी अलख जगाता है,

हाथ बड़ा के साई उसको अपनी शरण बिठाता है,

जो भी मिलते बेसहारे सब को वही संभाले,

है इक फकीरा शिरडी में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।