भोले दे दीवाने बन के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव दे नाम दी लेके मस्ती,

लेके मस्ती भूल के हस्ती,

बस ॐ नमो शिव गाइये ,

भोले दे दीवाने बन के,

आओ रल मिल भंगड़े पाइये भोले दे दीवाने बन के,

विच शिवाले आज है वज्दा डमरु डम डम करके,

शिव दे नाम दी मस्ती वाला पी लो प्याला भर के,

श्रद्धा दे नाल ध्यान लगा के भोले दे संग ताल मिला के,

हर चिंता नु भूल जाइये भोले दे दीवाने बन के,

आओ रल मिल भंगड़े पाइये भोले दे दीवाने बन के,

जैसा मेरा भोला शंकर वैसे उसदे पुजारी ,

हर पल मौज दे विच रेहँदी शिव दी फ़ौज प्यारी,

सोचा फिकरा दूर भगाके शिव दे नाम दी लोर च आके,

अज ऐसी भी मौज मनाइये भोले दे दीवाने बन के,

आओ रल मिल भंगड़े पाइये भोले दे दीवाने बन के,

भोले दी भगति दा सागर जलवा बड़ा निराला,

भगति दा एह मेवा मीठा पोंदा कर्मा वाला,

भोले दा जो नाम धयाँदे अपने सुट्टे भाग जगाउंदे ,

आज असि भी भाग जगाइए भोले दे दीवाने बन के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।