गुण गाऊ सदा मैं तेरे

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॥ पावन पाठ ॥

गुण गाऊ सदा मैं तेरे मेरे सिर पे हाथ दया का धर दो साईं मेरे,

दुःख चिंताओं के तुम बाबा आज उठा लो डेरे,

गुण गाऊ सदा मैं तेरे

जब जब देखू साईं बाबा तेरा मुखड़ा नूरी,

तुझमें बडती जाए मेरी श्रधा और सबुरी ,

ज्योति से तुम ज्योत मिला के करदो दूर अँधेरा,

गुण गाऊ सदा मैं तेरे

और किसी की लगन रहे न एसी लगन लगा दो,

बाबा मेरे होश बुला के सोये भाग जगा दो,

अंतर मन की मेल मिटा के मन में करो व्सेरे,

गुण गाऊ सदा मैं तेरे

देखा है जो सागर ने पूरा करदो सपना,

शरण लगा लो अपनी बाबा मुझे बना के अपना,

होते रहे ये दर्शन तेरे मुझको शाम सवेरे

गुण गाऊ सदा मैं तेरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।