आगी बन के सहारा जब जब तुझे पुकारा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लचके है निमिया की डाली ओ देवी मैया लेहरे चुनरिया है लाली,

तुम ही धुप हो तुम ही छाया तुम जगजानी तुम ही माया,

आगी बन के सहारा जब जब तुझे पुकारा,

तुम हो तो परवाह नहीं है,तेरे सिवा कोई चाह नहीं है,

तुम ही धुप हो तुम ही छाया तुम जगजानी तुम ही माया,

आगी बन के सहारा जब जब तुझे पुकारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।