तू ही तू मैया तू ही तू

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरा नूर माँ मेरी हस्ती में तेरा चर्चा रूह की वस्ती में,

मेरे अरमानो की कश्ती में तू ही तू मैं नहीं मैया तू ही तू,

मेरी बातो की ख़ामोशी में मेरी सांसो की सरगोशी में,

मेरे होश और बेहोशी में,तू ही तू मैं नहीं मैया तू ही तू,

मेरे इक भी लम्हे पर मेरा नामो निशान नहीं,

सोच में बैठी तू दूर सही पर जुड़ा नहीं,

मेरी हालत में हलातो में मेरे खाबो में जज्बातो में,

इन अंसुवन की बरसातों में तू ही तू मैं नहीं मैया तू ही तू,

छोड़ू हाथ जब मेरा माँ देखु तुझे लकीरो में .

सजदे राह बिचाऊ मैं आस की इन तकदीरो में

नील कंठ की यादो में सुख जिन्दर की फ़रयादो में मेरी रूह में और इरादों में

तू ही तू मैं नहीं मैया तू ही तू,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।