रब निक्का जेहा दर रत्नो दा खडकोंदा है

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॥ पावन पाठ ॥

रब निक्का जेहा दर रत्नो दा खडकोंदा है

खैरा पा दे जोगी आया पहली वारी,

गोआ चार मेरिया लस्सी रोटी देन्दु गी

माँ मैनु कहदे पूत मेरा बन जा इक वारी

पैरी पाहुये गल विच सिंगी हथ विच चिमटा है

झोली बाह विच सूरत लगदी जानो वध प्यारी,

सोने रंगियां जटावा सिर ते चमका मार दियां,

कहन्दे भेटि चरनी झुक्दी खनकत सारी,

कहन्दे रतनो दे कर्जा धर्मो माँ दा ला के नहीं,

उड़ गया पौना दे विच बाबा पौणाहारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।