हम बाँध ते है ज्यादा और काट ते है कम

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॥ पावन पाठ ॥

बंधन पाप कर्मो के यु कैसे हो ख़त्म,

हम बाँध ते है ज्यादा और काट ते है कम,

हम अपनी आत्मा पे ही क्यों धा रहे सितम,

हम बाँध ते है ज्यादा और काट ते है कम,

क्या आतम शुदी की खातिर हम ये जप तप करते है,

या स्वार्थ सीधी की खातिर हम भगवान को भजते है,

थोड़ी सी पूजा करके हम खुद को खुदा समज ते है,

फिर उस पूजा के बदले दिन भर मन मानी करते है,

कर्म करते बात बुल जाते है कर्म,

हम बाँध ते है ज्यादा और काट ते है कम,

साथी आगे बढ़ता है तो हम को नहीं सुहाता है,

नजर पडोसी पर रहती वो क्या पीता क्या खाता

माना चोरी जुरम बड़ा है फिर भी कुछ तो आता है,

इर्षा निंदा चुगली में तो फस जाता ही जाता है,

निंदा चुगली किये बिना कुछ होता नहीं हजम,

हम बाँध ते है ज्यादा और काट ते है कम,

मात पिता की सेवा करने में जो कष्ट समझते है,

बूढ़ा होने पर वो भी सेवा के लिए तरस ते है

हम आज्ञाकारी है तो संतान मिले आज्ञाकारी,

सेवा करके ही हम सेवा करवाने के अधिकारी,

सुख मिलने से सुख मिलता है गम मिलने से गम,

हम बाँध ते है ज्यादा और काट ते है कम,

हाथ से या तो पुण्य कमा लो तुम या फिर नाम कमा लो तुम,

पत्थर पर लिखवा लो या ऊपर के लिए बचा लो तुम,

सब से बड़ी तपस्या ओ पि क्रोध पे काभु पा लो तुम,

चंचल मन जब लगे भटकने गीत प्रभु के गा लो तुम ,

काम क्रोध की अग्नि में हो जाते पुण्य भस्म,

हम बाँध ते है ज्यादा और काट ते है कम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।