बाबा जी सवार होके मोर ते

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॥ पावन पाठ ॥

चन चाननी जी अम्बरी चमकन तारे,

अखिया चूक चूक ओ देखन भगत प्यारे,

बैठा समाने आके आजो देखना जे रब,

गल मुकदी है प्रेम वाली थोड़ ते

तारेया दे देश विचो आये ने बाबा जी सवार होके मोर ते,

कौन कहंदा दसो असि बाबे न नि देख्या.

पूछो एहना कॉल जाके मथा जिहने टेक्या,

देखना ता दूर असि पैरा न भी छू लिया,

अखा विच सादे ओहने चंदा भी खु लिया,

साढ़े नाल बैठ गला कितिया किंज करिये भरोसा किसे होर ते,

तारेया दे देश विचो आये ने बाबा जी सवार होके मोर ते,

गला विच असि ओहनू कई वारि पूछियां रत्नो दे नाल सी तू केहड़ी ग्लो रूसिया,

एह भी साहनु दसो तुसी किना साहनु चोहने आ कदो तुसी जाग ते कदो तुसी सोने ओ,

केहन लगे छड़ो गला फेर करा गए आजो नाचिये प्रीता वाली लोर ते ,

तारेया दे देश विचो आये ने बाबा जी सवार होके मोर ते,

अपना ठिकाना ओहने साहनु सारा दस्या साहनु भी हसाया एते आप भी हसाया,

सुरजा दी लाली विच होवा परभात नु चन नाल बैठ के गला करा मैं रात नु,

कदे होवा धूप च कदे होवा छावा च एहनी गल कह के बाबा उड़ गया हवावा च,

देखना जे चाहना ओहनू फेर सुखिया गल पाके रखी मान वाले चोर ते ,

तारेया दे देश विचो आये ने बाबा जी सवार होके मोर ते,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।