इसे कहते हैं बजरंगबाला

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

प्रेम के रंग में ऐसी डूबी बन गया एक ही रूप

अपने आप से बाते करके हो गयी मैं बदनाम

साँसों की माला पे सिमरु मैं जय श्री राम

राम नाम जपते है मस्ती में रहते है

देव है ये सबसे निराला

इसे कहते हैं बजरंगबाला

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला

मंगल को जन्मे है मंगल ही करते

शुक्र और शनि जिनका पानी है भरते

राम का दीवाना है कहता ये जमाना है

देव है ये सबसे निराला इसे कहते हैं बजरंगबाला

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला

नारियल हो के साथ सवा रुपैया

भेंट जो चढ़ाए पार कर देते नैया

बिगड़ी ये बनाते है गले से लगाते है

ऐसे है अंजनी के लाला

इसे कहते हैं बजरंगबाला

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला

सिर पे मुकुट कुण्डल कानो में सोहे

झांकी निराली जो भक्तों को मोहे

बाँध के लंगोटा जो लेके हाथ सोटा जो

दुष्टों का मुंह करते काला

इसे कहते हैं बजरंगबाला

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला

जानकी के प्यारे है अंजनी के दुलारे है

कलयुग में हमसब भक्तों के सहारे है

राम का दीवाना है कहता जमाना है

नरसी को तुमने संभाला

इसे कहते हैं बजरंगबाला

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला

राम नाम जपते है मस्ती में रहते है

देव है ये सबसे निराला इसे कहते हैं बजरंगबाला

ओ बाला इसे कहते हैं बजरंगबाला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।