सुन मेरी शेरोवाली माता ओ माता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुन मेरी शेरोवाली माता ओ माता,

मुझे ये पहाड़ तेरे चढ़ नहीं जाते,

ऊंचे ये पहाड़ तेरे चढ़े नहीं जाते,

नांगे नांगे पाँव मेरे छाले है आ जाते,

पास मेरे आजा मेरी माता ओ माता,

तांबे के कलशा गंगा जल लेके आई,

लाल लाल हलवा लाल डलियां मैं लाइ,

कैसे मैं चड़ाउ मेरी माता बता जा,

सुन मेरी शेरोवाली माता ओ माता,

लाल लाल चुनर लाल घोटा है लगाया,

सलमा सितारों से मैया उसे है सजाया,

कैसे मैं चढ़ा दू मेरी माता बता जा,

सुन मेरी शेरोवाली माता ओ माता,

लाल लाल बिंदियां और लाल सिन्धुवा,

लाल लाल चूड़ियां और लाल नक् मुंदरियाँ,

कैसे पहनादु मेरी माता बता जा,

सुन मेरी शेरोवाली माता ओ माता,

गले में हरवा और पाँव में मोहरावा,

गुच्छा कमरिया में पाँव में बिछियां,

तुझको पहनादु मेरी माता ओ माता,

सुन मेरी शेरोवाली माता ओ माता,

बेटी ये पुकार रही तुझे मेरी माता,

आज का नहीं है है ये जन्मो का नाता,

माता की छाव तू दिखा जा,

सुन मेरी शेरोवाली माता ओ माता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।