भर दे खली झोली सुने घर के कोने

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सुने घर के कोने सुने सुने खिलोने

कब से खड़ी तेरे द्वार पे बाला जी बलिशली

भर दे खली झोली सुने घर के कोने …

एक ही सपना मैं हर रोज सजती हूँ

इतने वर्षों से मैं लोरिया गाती हूँ

फिर भी है कब से है सुनी पलने की ये डोरी

भर दे खली झोली ….

जबजब रंगों का त्यौहार ही आता है

एक सवाल ही बार बार ही मंडराता है

पिचकारी लेके कौन मुझसे खेलेगा होली

पतझड़ में भी डाली पे फूल खिलता है

बाबा तेरे दरबार में उत्तर मिलता है

कब से तड़प है कब सुन पाए तितली बोली

भर दे खली झोली

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ताने सुनके लोग के थक जाते है

तो जाने क्यों हैं मेरे भर आते है

किस्मत यु कब तक खेलती रहे आँख मिचौली

सुने घर के कोने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।