जोगी मेरे तू सिखाया

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॥ पावन पाठ ॥

जोगी मेरे तू सिखाया मेनू जीना ,

साह सारे तेरे नाम हों गे,

धन शोरता तो दस की मैं लेना

जद आखिर मोड़े चार होंगे,

तेरे तो उम्मीद मेरी तू ही उडीक मेरी

सफल है जीना मरना हो जे इको दीद तेरी,

तेरे नाल जोगी मेरे साह,

जोगी मेरे तू सिखाया मेनू जीना सहा तेरे नाम होंगे,

जोगियां वे तारी रखी जिन्गदी सवारी रखी,

जोगी तेरे बिन है एह हनेरा,

इक रंग तू भी रखी दूजी नाम खुमारी रखी तीजा रखी कदमा च सिर मेरा,

जोगी मेरा साथ तू है पौनाहारी नाथ तू है,

मंजिल जन्नत ही है,

जेह्डा जोगी राह तू है

उस राह ते चलना सिखा,

जोगी मेरे तू सिखाया मेनू जीना सहा तेरे नाम होंगे,

दुनिया दा जानी जोगी हां तू है दातरी जोगी

जोगी शाम जोगी है सवेरा,

मोर है सवारी जिहदी सिर ते प्यारी जिहदी,

बाबा जटाधारी है ओ मेरा,

गुफा विच डेरा तेरा बाबा मैं मुरीद तेरा,

जिथे नाम तेरा आवे खिल जांदा सुन दिल मेरा ,

दिल दी सुनंदा इह हमेशा,

जोगी मेरे तू सिखाया मेनू जीना सहा तेरे नाम होंगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।