साईं का जलवा है चारसू

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॥ पावन पाठ ॥

दीदार के काबिल तो कहा मेरी नजर है,

ये तेरी इनायत है के रुख तेरा इधर है,

हर शेह में तेरा जलवा मुझे आता नजर है,

साईं का जलवा है चारसू

आँखों ने तेरे बाद कुछ भी देखा नही है,

कितना हसीं है के तुझसा कोई नही है,

मैंने नही ये बात जमाने ने कही है,

साईं का जलवा है चारसू

जिस को भी देखा तुमने उसे दीवाना कर दियां,

खाली गिलास था तुम ने पैमाना भर दियां,

एसा नशा चडाया के दीवाना कर दियां,

साईं का जलवा है चारसू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।