घोट के पी या छानी हुई पी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

घोट के पी या छानी हुई पी,

या अपने भगतो के हाथो से तू पी,

रे पी ले भोले तू पी ले भोले,

बूटी ये प्रेम से बनाई है पर्वत केलाश से मंगवाई है,

प्रेम से पी ले आजा तीनो लोको के राजा भगतो ने प्रेम से चलाई है,

घोट के पी या छानी हुई पी,

या अपने भगतो के हाथो से तू पी,

रे पी ले भोले तू पी ले भोले,

गोरा जो साथ नही आएगी बुट्टी अधूरी रह जायेगे ,

संग में लाना चाहिए दर्शन दिखला चाहिए,

दोनों की शोभा बड जायगी,

घोट के पी या छानी हुई पी,

या अपने भगतो के हाथो से तू पी,

रे पी ले भोले तू पी ले भोले,

माना तू शंकर निराला है गले में सर्पो की माला है,

चाँद सा मुखड़ा तेरा वास पर्वत पे तेरा चारो तरफ उज्यारा है,

घोट के पी या छानी हुई पी,

या अपने भगतो के हाथो से तू पी,

रे पी ले भोले तू पी ले भोले,

शर्मा ये भोग लगता है चरणों में शीश निभाता है,

नाव भवर में मेरी आगे मर्जी है तेरी पार लगाना तुम को आता है,

घोट के पी या छानी हुई पी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।