हो के रहे रे होनी होके रहे रे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हो के रहे रे होनी होके रहे रे,

इसे सच भी न मानो इसे झूठ भी ना मानो,

हो के रहे रे होनी होके रहे रे,

होनी रानी महारानी होनी के सब गुलाम,

होनी सुबह देखती है न देखती है शाम,

ये तो चाल चले ये तो वार करे ये तो चुप रहे रे,

हो के रहे रे होनी होके रहे रे,

हो होनी किसे को न छोड़े राजा हो या रंक,

पानी तक न वो मांगे होनी मारे जब भी डंक,

रहे झाडी न पहाड़ जिस और बहे रे,

हो के रहे रे होनी होके रहे रे,

कही ऋषि मुनि आये कही आये अवतार,

राहा कोई नही बाकी होनी के सब शिकार

सचा वही है ठिकाना इसे तूने नही जाना इसे सच मान रे,

हो के रहे रे होनी होके रहे रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।