भवानी तुम्हारी शरण आ गया हूँ

जसवंत सिंह जी
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भवानी तुम्हारी शरण आ गया हूँ

बिना भक्ति के हो गए करम काले,

लगाने तुम्ही से लगन आ गया हूँ ।

भवानी तुम्हारी शरण आ गया हूँ...

जभी जनम पाया, तभी भव में डूबा,

मैं करने को भव से तरन आ गया हूँ ।

भवानी तुम्हारी शरण आ गया हूँ...

कई जनम पाए कई योनियों में,

ख़त्म करने आवागमन आ गया हूँ ।

भवानी तुम्हारी शरण आ गया हूँ...

तेरे जल हैं करते ह्रदय तम को निर्मल,

मैं करने मधुर आचमन आ गया हूँ ।

भवानी तुम्हारी शरण आ गया हूँ...

चरण चूमते ऊँचे पर्वत तुम्हारे,

मैं चढ़ के चढ़ाई कठिन आ गया हूँ ।

भवानी तुम्हारी शरण आ गया हूँ...

कवि: ब्रह्मलीन स्वामी श्री अखिलेश जी

स्वर: जसवंत सिंह जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।