सुख जे माइये किरपा तेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सुख जे माइये किरपा तेरी दुःख भी तेरा परशाद माँ,

तहियो आसा ने दुःख सुख अन्दर रखिया है तेनु याद माँ,

सुख जे माइये किरपा तेरी दुःख भी तेरा परशाद माँ,

की की नित तू खेड दी खेडा तेरिया तू ही जाने माँ,

किस वेले की रंग विखोना हों हैरान सयाने माँ ,

बिन दुखा दे सुखा वाला औंदा नही स्वाद माँ,

सुख जे माइये किरपा तेरी दुःख भी तेरा परशाद माँ,

धूपा भरेया दिन भी तेरा तेरिया ही कालियां राता माँ

साडी अक्ल नु जिन्देरे लावन तेरियां गुंजिया बाता माँ

सुख दुःख औंदे जांदे रहंदे इक दूजे तो बाद माँ,

सुख जे माइये किरपा तेरी दुःख भी तेरा परशाद माँ,

खिड़े होए जदों दिसदे किधरे कन्देया अन्दर फूल माइये,

वेचैनी नु चैन आ जांदा,सब दुःख जांदे भूल माइये,

तू कष्टा दी कैद च जेह्ड़ेकर सकदी आजाद माँ,

सुख जे माइये किरपा तेरी दुःख भी तेरा परशाद माँ,

नरज जे एह्द्र मेहर दी रखे असी भी सीखिए हसना माँ,

तेरे सिवा निर्दोशा दिल दा हाल किसे नु न दसना माँ,

कदेता तेरे कनी पोंछु साड़ी भी फरयाद माँ,

सुख जे माइये किरपा तेरी दुःख भी तेरा परशाद माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।