जगराते दी सुहानी रात आई नि अमिये

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जगराते दी सुहानी रात आई नि अमिये

जय जय कार भगता ने लाइ तेरी अमिये,

जगराते दी सुहानी रात आई नि अमिये

मेहँदी वाला रंग तनु चड़या गुदा नहीं,

सेवका चढ़ाया तनु लाल छुड़ा नी,

तेरे नाल प्रीत आसा लाइ नी अमिये,

जगराते दी सुहानी रात आई नि अमिये

भोले बचैया दा माँ इक तू ही ता सहारा है,

नील ते अल्फाज ने म्लेया तेरा द्वारा है

साडी भी लाज नु बचाये नहीं अमिये,

जगराते दी सुहानी रात आई नि अमिये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।