जब से तेरी मेरी मुलाक़ात हो गई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जब से तेरी मेरी मुलाक़ात हो गई सारे कहते है करा मात हो गई

इक वो जमाना था थॉर न ठिकाना था,

देखते ही मुझे आँखे फेर ता ज़माना था,

किस्मत बुलंद रातो रात हो गई,

जब से तेरी मेरी मुलाक़ात हो गई सारे कहते है करा मात हो गई

तेरे दरबार में झूम झूम औ मैं तूने जो दिया है वो सब को बताओ मैं,

खुशियों की जैसे बरसात हो गई, सारे कहते है करा मात हो गई

जब से तेरी मेरी मुलाक़ात हो गई सारे कहते है करा मात हो गई

दुनिया को छोड़ पूजा तेरे दर आ गई मांगी जो मुरादे वो पल ही पा गई,

किये जो दीदार माँ से बात हो गई,किस्मत बुलंद रातो रात हो गई,

सारे कहते है करा मात हो गई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।