हर साह सिमरा मैं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हर साह सिमरा मैं तेरा नाम दातिए मुख मेतो न मोड़ी

कदमा नाल लाके रख ले माँ दिल मेरा न तोड़ी,

हर साह सिमरा मैं तेरा नाम दातिए मुख मेतो न मोड़ी

आजा माये दर्श दिखा दे नैना दी माये प्यास बुजा दे,

बैठा दर तेरे आके माये ता दातिए दिल मेरा न तोड़ी,

हर साह सिमरा मैं तेरा नाम दातिए मुख मेतो न मोड़ी

शेरावालिये मेहरा करदे सब दिया खाली झोलिया भर दे,

पूरी दिल वाली करदी माँ दातिए मुख मेतो न मोड़ी,

हर साह सिमरा मैं तेरा नाम दातिए मुख मेतो न मोड़ी

जोगी तेरा नाम ध्यावे सोनू माँ रंग विच रांगेया जावे,

फड़ी दुब्दै दी माये मेरी ब्याह

हर साह सिमरा मैं तेरा नाम दातिए मुख मेतो न मोड़ी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।