माँ करते तेरा वंदन स्वीकार करो न

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ करते तेरा वंदन स्वीकार करो न

है मुकत करो इक दानव आया है करोना,

हर और मची त्राहि त्राहि गबराया सब संसार,

सब शोक में है नर नारी चहु और है हाहाकार

हर ले अब संकट आके उधार करो माँ,

है मुकत करो इक दानव आया है करोना,

ना मांग किसी की उजड़े ना खोये लाल को,

ना भाई किसी का बिछड़े सब कोसे काल को,

अब टूटी धीर बंधा ने सरकार चलो न,

है मुकत करो इक दानव आया है करोना,

ये हरी भरी है भगियां न उजड़े फुलवाड़ी,

ना भुढा बाप ही रोये ना रोये मेहतारी,

फैला ममता का आंचल थोड़ा प्यार करो न,

है मुकत करो इक दानव आया है करोना,

अब युगत सभी कर डाली सब रक्षा वहीं से,

विष दंशी ये दानव आया है चीन से,

तुम काली रूप में संघार करो माँ,

है मुकत करो इक दानव आया है करोना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।