माँ आंबे तुम्हे मैं खत लिखती पर पता मुझे माँलूम नहीं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ आंबे तुम्हे मैं खत लिखती पर पता मुझे माँलूम नहीं

दुःख भी लिखती सुख भी लिखती पर पता मुझे मालुम नहीं,

माँ आंबे तुम्हे मैं खत लिखती पर पता मुझे माँलूम नहीं

सूरज से पूछा चंदा से पूछा पूछा टिम टिम तारो से,

इन सब ने कहा अम्बर में है पर पता मुझे मालूम नहीं,

फूलो से पूछा कलियों से पूछा पूछा बाग़ के माली से,

इन सब ने कहा अम्बर में है पर पता मुझे मालुम नहीं ,

नदियों से पूछा लेहरो से पूछा पूछा बेह्ते झरनो से ,

झरनो से कहा सागर में है पर पता मुझे मालुम नहीं,

साधो से पूछा संतो से पूछा पूछा दुनिया के योगो से

इन सब ने कहा है हिरदये में है पर पता मुझे मालुम नहीं,

माँ आंबे तुम्हे मैं खत लिखती पर पता मुझे माँलूम नहीं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।