तू दर गुफा दा खोल बाबा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

चा दिल दे दिल विच रह गए ने की वर्तेया बाना है,

तू दर गुफा दा खोल बाबा असि दर्शन पौना है,

दिल खुपा मार के रोया है एह सादिया विच होया है

किथों चल करोना आया है क्यों दर गुफा दा ढोया है

अखियां को अथरु वग दे भुलैया पीना खाना है,

तू दर गुफा दा खोल बाबा असि दर्शन पौना है,

दुनिया दी रख्या कर बाबा खुशिया होवण घर घर बाबा,

हो जाए दूर करोना दुनिया तो कोई ऐसा मंत्र पड़ बाबा,

आजा करके मोर सवारी जोगी उल्जिया थाना है

तू दर गुफा दा खोल बाबा असि दर्शन पौना है,

एह समय दे चखड झूले ने इक गल सब दुःख विच बुले ने,

लोहे दे गेट बंद होये दिल दे दरवाजे खुले ने,

धर्म वीर निशु न आखे भगता ना गबराना है

तू दर गुफा दा खोल बाबा असि दर्शन पौना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।