जय माता दी बोल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ बुलावे बचेयाँ नूँ, माँ बुलावे भगतां नूँ,

मंदिरां दे विच बैठी आदिकुमारी, लंगरवीरा वे तूँ वी करले तैयारी,

पीछे भैरों जती चंवर झुलावै, पत्तेया ते लिख लिख के,

मैया बच्चेया नूँ चिठिया पावे, पत्तेया ते लिख लिख के,

मैया बच्चेया नूँ चिठिया पावे, पिपली दे पत्तेया ते,

(माँ बुलावे बचेयाँ नूँ, माँ बुलावे भगतां नूँ,)

चिठ्ठी विच जो प्यार वाले लिखे बोल ने,

दिन सौण दे नरातेयां दे अनमोल ने,

(माँ बुलावे बचेयाँ नूँ, माँ बुलावे भगतां नूँ,)

चिट्ठी पढ़ के न बहना, नाल संगतां नूँ लैणा,

शेरांवाली मैया आप बुलावे, पत्तेया ते लिख लिख के,

मैया बच्चेया नूँ चिठिया पावे, पत्तेया ते लिख लिख के,

मैया बच्चेया नूँ चिठिया पावे, पिपली दे पत्तेया ते,

(माँ बुलावे बचेयाँ नूँ, माँ बुलावे भगतां नूँ,)

जेहड़ा होऊगा नसीबा वाला मंदिरां नूँ जाऊ,

शेरांवाली माँ दे दर उत्ते नच नच गाऊ,

(माँ बुलावे बचेयाँ नूँ, माँ बुलावे भगतां नूँ,)

ओहनु थोड़ नहियों रहनी, खाली झोली भर लैनी,

मैया डिग्गेया गल नाल लावे, पत्तेया ते लिख लिख के,

मैया बच्चेया नूँ चिठिया पावे, पत्तेया ते लिख लिख के,

मैया बच्चेया नूँ चिठिया पावे, पिपली दे पत्तेया ते,

(माँ बुलावे बचेयाँ नूँ, माँ बुलावे भगतां नूँ,)

माँ दे भगतां प्यारेयाँ नूँ आईआं चिट्ठीयां,

सब्बे पढ़ पढ़ गल नाल लाईआं चिट्ठियां,

(माँ बुलावे बचेयाँ नूँ, माँ बुलावे भगतां नूँ,)

गड्डी खड़ी ऐ शिंगारी, राजू कर लै तैयारी,

रमेश उच्ची उच्ची ढोल बजावे, पत्तेया ते लिख लिख के,

मैया बच्चेया नूँ चिठिया पावे, पत्तेया ते लिख लिख के,

मैया बच्चेया नूँ चिठिया पावे, पिपली दे पत्तेया ते,

Pandit Dev Sharma

7589218797

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।