गल पा के मैया दियां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

गल पा के मैया दियाँ चुन्नियां, अज्ज मैनु नच लैण दे,

ज्योतावाली, शेरांवाली, जीहनु केहन्दे मेहराँवाली,

सारी दुनिया नूँ दस्स लैण दे, के अज्ज मैनु नच लैण दे,,,,

इक इक पौढ़ी तेरी नच नच चढ़नी

पैरी पा के झांझरां मैं भेट तेरी पढ़नी

मैनु रोको न कोई टोको, में दीवानी हां वे लोको

मैनु कमली नू नच लैण दे, के अज्ज नच लैण दे,,,,,

चंगी हाँ या मंदी हाँ मैया जय तेरी बंदी हाँ

फेर वी मैं बहुतेयाँ शरीफां कोलो चंगी हाँ

देखे गुणी ग्यानी बन्दे, खांदे गौशाला दे चंदे

ऐसे बन्देयाँ तों बच लैण दे, के अज्ज मैनु नच लैण दे,,,,,

काफ़िर ने लोक जेहड़े माँ नूँ नीं मनदे

पीर बली औलिये असमानों ते नहीं जमदे

सब नूँ जन्मन वाली मायें, सब तों उच्चा माँ दा नायें

सारी दुनियां नूँ दस्स लैण दे, के अज्ज मैनु नच लैण दे,,,,

क्यों न करां बंदगी मैया जी तेरे नाम दी

हर थाँ ते लाज रखी मरजाने मां दी

सब नूँ जन्मन वाली मायें, सब तों उच्चा माँ दा नायें

सारी दुनियां नूँ दस्स लैण दे, के अज्ज मैनु नच लैण दे,,,,

Pandit Dev Sharma

7589218797

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।