जय माता दी इक

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी मैया ने मौजा ला दितिया शेरावाली ने मौजा ला दितियाँ,

पाके मेरी झोली विच सूखा दे सवेरे, कर दिते दूर सारे दुख दे हनेरे,

मेहरा वाली मन वरसाता, मेहरा दी वरसात किया,

मेरी मैया ने मौजा ला दितिया शेरावाली ने मौजा ला दितियाँ,

जदो तो माँ दी मैं बाह फड़ी आ थोड़ नहीं रेहँदी मैनु,

दर दर जा के मंगन दी हुन लोड नहीं पेंदी मैनु,

जद भी मैं झोली फैलाई, माँ ने खैरा पा दितिया,

मेरी मैया ने मौजा ला दितिया शेरावाली ने मौजा ला दितियाँ,

कोठी दिति कार दिति दिति जायदात एह,

झोली विच पाई मेरी माँ हीरे जाहि औलाद एह,

मेरे जीवन भर दियां रावा खुशियां नाल सजा दितियाँ,

मेरी मैया ने मौजा ला दितिया शेरावाली ने मौजा ला दितियाँ,

दुनिया में रुतबा है मेरा मान और समान है,

तेरी बदौलत जग में मिली दास नु पहचान है,

बक्शा ेहना मान की जग विच लहरा वेहरा कर दितिया,

मेरी मैया ने मौजा ला दितिया शेरावाली ने मौजा ला दितियाँ,

Pandit Dev शर्मा

7589218797

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।