भंगडा पांदे ने मा दे भक्त प्यारे

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

ढोलक वजदी छेने वजदे गूंज रहे जयकारे,

भंगड़ा पौंदे ने माँ दे भगत प्यारे.....

माँ दे भोले भगता ने आज, रल के जगन रचाया,

जगमग हो रही किना सोहना, माँ दा भवन सजाया,

संगता आईयाँ, देन बधाइयाँ, झूम रहे ने सारे,

भंगड़ा पौंदे ने माँ दे भगत प्यारे,

आदि गणेश मनाके माँ दे, भगता जोत जगाई,

करी बेनती सचे मन नाल, माँ जागे विच आई,

दर्शन करलो, झोल्लिया भरलो, खुल गये ने भंडारे,

भंगड़ा पौंदे ने माँ दे भगत प्यारे....

जगदम्बे ने खोलिया साडी, बदकिस्मत दा ताला,

शर्मा दे नाल घूम रह है, दुर्गा मंडल सारा ,

शेरा वाली, मेहरा वाली, सबदे बेड़े तारे,

भंगड़ा पौंदे ने माँ दे भगत प्यारे,

Pandit Dev Sharma

7589218787

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।