॥ पावन पाठ ॥
यमुना किनारे मेरो गांव सँवारे आई जइयो,
जो कान्हा मेरा गांव न जाने,
बरसानो मेरो गांव सँवारे आई जइयो,
यमुना किनारे मेरी ऊंची हवेली,
बैठक आलिशान सँवारे आई जइयो,
मैं मेहलन की राज कुमारी,
पिता मेरे बिश्बान सँवारे आई जइयो,