मेने मारे रोटी दे

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जोगियां तू मेरा न बनिया मैं तनु अपना समजदि रही,

नि माये धर्म दा पुत्र बना दे मेने मारे रोटी दे,

की होया जे जाय नि तनु न गोदी लाड लड़ाया नहीं तनु ,

तेरा जावे न विछोड़ा जारेया तनु अपना समज दी रही,

जोगियां तू मेरा न बनिया मैं तनु अपना समजदि रही,

नि माये तू की कद्र पाइया १२ गौए साल चराइया,

गला लोका दिया विच आके महीने मारे रोटी दे,

नि माये धर्म दा पुत्र बना दे मेने मारे रोटी दे,

वजेया सी मेरी अक्ल नु ताला मंदा बोल गई सी बाला,

हूँ पछतावा की करेया मैं तनु अपना समज दी रही,

जोगियां तू मेरा न बनिया मैं तनु अपना समजदि रही,

ना मैं किसे दी फसल उजाड़ी निघा मार देख इक वारी,

माँ तू खेता दे विच जाके मेहने मारे रोटी दे

नि माये धर्म दा पुत्र बना दे मेने मारे रोटी दे,

कूका रेहनमाजरा लिखदे इस विच दोष भला है किस दा,

मैं ता सब कुछ जित के हरैया मैं तनु अपना समजदि रही,

जोगियां तू मेरा न बनिया मैं तनु अपना समजदि रही,

सच कहंदा राम तिरेले वाला पुरे हो गए माँ साल १२

दसना पिंड पतलावा जाके मेहने मारे रोटी दे,

नि माये धर्म दा पुत्र बना दे मेने मारे रोटी दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।