असि दिल अपने ते ना लिखियाँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं दर ते आउने है सब कड के मनो ख्याल,

असि दिल अपने ते ना लिखियाँ नाम लिखियाँ चावा नाल माँ,

मैया साहनु अपने रंगा दे विच रंग दे,

जिंदगी जीयों वाला साहनु दस ढंग दे,

जेहड़े रावा ते तू चला है असि ओथे ही चला नाल माँ,

असि दिल अपने ते ना लिखियाँ नाम लिखियाँ चावा नाल माँ,

भगत प्यारे तेरी जय जय कार करदे ऐसी कर किरपा माँ दुःख साढ़े हरदे,

कदे घर साढ़े भी पा फेरा पा होक शेर सवार माँ,

असि दिल अपने ते ना लिखियाँ नाम लिखियाँ चावा नाल माँ,

मंडी कला वाला तेरे दर दा सवाली माँ हर साल आउ वीला मोड़ी कदी खाली न,

माला नाम तेरे दी जपदा है लगी रेहँदी दिल नु भाल माँ,

असि दिल अपने ते ना लिखियाँ नाम लिखियाँ चावा नाल माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।