नन्हे नन्हे पाँव मेरे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नन्हे नन्हे पाँव मेरे पूजा ऊचा पर्वत तेरा,

देख कही मैं गिर न जाऊ हाथ पकड़ ले मेरा,

माँ फिर ससे पवन का तू रूप बना के,

मुझे अपने द्वारे तू ले चल उड़ा के

घर से तो निकला था आज अकेला,

मिला मुझे राहो में दुनिया का मेला,

भीड़ में सब के सब है तेरे दीवाने मुझको तेरी धुन है ये कोई न जाने,

सब के मन में माता तेरे दर्शन की अभिलाषा है,

तू सबकी जीवन आशा है जय तेरी माँ जय तेरी माँ,

नन्हे नन्हे पाँव मेरे पूजा ऊचा पर्वत तेरा,

मेरी लगन की मैया है यही कहानी भूख लगी है मुझको न पिया पानी,

धुप बनी है छाओ तेरे राहो में,थके न मेरे पाँव माँ तेरी राहो में,

सब के मन में माता तेरे दर्शन की अभिलाषा है,

तू सबकी जीवन आशा है जय तेरी माँ जय तेरी माँ,

नन्हे नन्हे पाँव मेरे पूजा ऊचा पर्वत तेरा,

नाम तेरा ले ले के मैं बढता आया,

रुके बिना पर्वत पे मैं चडता आया,

आ पौंचा हु मैया मैं भवन में तेरे मिले दूर न होना नैनो से मेरे,

सब के मन में माता तेरे दर्शन की अभिलाषा है,

तू सबकी जीवन आशा है जय तेरी माँ जय तेरी माँ,

नन्हे नन्हे पाँव मेरे पूजा ऊचा पर्वत तेरा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।