साहनु लोका दे विच बेठण जोगा करता जोगी ने

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॥ पावन पाठ ॥

जोगी लौंडा न कोई लारे साढ़े वर्गे लखा तारे,

लेखा दे विच ऐसा कोका जड़ ता जोगी ने,

साहनु लोका दे विच बेठण जोगा करता जोगी ने ,

हूँ ते लगियाँ मौज बहारा कोठिया दे विच खड़ियाँ कारा,

अंदर तक की वेहड़ा साडा भरता जोगी ने,

साहनु लोका दे विच बेठण जोगा करता जोगी ने ,

जोगी दिया करा तरीफा नीडे आन न दुःख तक्लीफा,

हर जेमत नु रहमत नु सची हरता जोगी ने,

साहनु लोका दे विच बेठण जोगा करता जोगी ने ,

बिल्ला पिंड फरवाले वाला जोगी ना दी फेर दा माला,

गोल्डी विच भी गौने दा ढंग भरता जोगी ने,

साहनु लोका दे विच बेठण जोगा करता जोगी ने ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।