बाबा तेरे मेले आवा मैं

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा इक दवी सकूटर बिगड़े कम कर दी सुतर,

नाले लावा झूठे नाले यश गावा मैं ६० दी स्पीड तेरे मेले आवा मैं,

लंगन न दवा मारुती जद भी मैं फूल भजावा ,

डिकी विच डेक लगा के तेरिया ही भेटा गावा,

सोटी वाली बस पीछे छड जावा मैं,

६० दी स्पीड तेरे मेले आवा मैं,

तडके मैं उठ के नहा के सोहने जाहे कपड़े पा के,

बम्पर ते झंडा लाके दीपक नु पीछे बिठा के

चाहे आवा कचे चाहे पक्के आवा मैं ,

६० दी स्पीड तेरे मेले आवा मैं,

मथे ते तिलक लगा के स्कूटर ते चार बिठा के,

सिर उते हेल्मट पाके नाके तो अख बचा के,

दिल विच तेनु ही द्यावा मैं,

६० दी स्पीड तेरे मेले आवा मैं,

हथ च चिमटा लेके उची दर भेटा गावे ,

जोगी तेरी गुफा च आके चाभी चरना नाल लावा

भगत मिनटे वांग तेरे मेले आवा मैं

६० दी स्पीड तेरे मेले आवा मैं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।