जगमग ज्योत उजारी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जगमग ज्योत उजारी,

ओ मैया तेरी जगमग ज्योत उजारी।

सूरज चंदा नवल पदार्थ,

जाग्रत ज्योत के हैं सब बालक

मैया तेरी चरण धुल से, हिले फूलन की क्यारी

चरना कमल नूपूर धुन रुनझुन,

गीत भवर गुण गाए धुन धुन

संकट हरनी शुभ गति शुभ मति, पाए सब संसारी

पूरब पछिम उत्तर दक्षिण,

जागर रात उजागर हैं दिन

जय माता की, माती की जय, गावे सब नर नारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।