मिलकर सारे जय बोलो अग्रसेन महाराज की

सौरभ मधुकर
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॥ पावन पाठ ॥

आन बाण और शान है जो अग्रवाल समाज की ,

मिलकर सारे जय बोलो अग्रसेन महाराज की ।

मात भगवती देवी और बल्लभसेन के जाये,

नागवंश की राजकुमारी माधवी के संग ब्याहे,

तीन लोक में फैली ख्याति अग्रवंश सम्राट की,

मिलकर सारे जय बोलो अग्रसेन महाराज की ।

अग्रसेन महाराज ने अठारह गोत्र बनाये,

अग्रसेन के वंशज सारे अग्रवाल कहलाये,

स्वर्णिम गौरव-गाथा है जी अग्रवंश इतिहास की,

मिलकर सारे जय बोलो अग्रसेन महाराज की ।

पाप अधर्म और हिंसा से जब अंधकार था छाया,

सत्य अहिंसा का इन्होंने सब को मार्ग दिखाया,

"सौरभ मधुकर" नींव पड़ी तब अग्रोहा साम्राज्य की,

मिलकर सारे जय बोलो अग्रसेन महाराज की ।

भजन गायक - सौरभ मधुकर

भजन रचयिता - मधुकर

संपर्क - 9831258090

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।