हुंडिया माँ मुरादा पूरियां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लगी रौनक बड़ी है दरबार ते है नहीं ऐसा कोई द्वारा संसार ते,

बैठे संगता दे टोले कोई जैकारा माँ दा बोले,

कई नच्दे भगत प्यारे शेरावाली डाटा वंड दी,

शेरावाली दे भवन सोहने लगदे,

पेंदे भंगड़े ते नाले ढोल वजदे,

झंडे हठा च फदे कई कटारा च खड़े

नूर वर्से ते पैन चमकारे हुंडिया माँ मुरादा पूरियां,

कई करके दण्डोत आये चढ़ के चढ़ाई

सेवादार मुहरे मुहरे करि करि जांदे ने सफाई,

मुहो मंगे मिले सोइ रेहँदी घात नहीं कोई ,

ेथो मिलदे अखा दे तारे शेरावाली डाटा वंड दी,

लाल चुनिए सिरा दे परशाद हथी लेके,

दुःख माँ नु सुनादे बचे चरना च बह के,

माँ पल भी न लावे सारे दुःख कटी जावे जेह्डी जेहडी भी कोई अर्ज गुजारे,

हुंदिया माँ मुरादा पुरियां,

लड़ लगेया मैया दे चरना च बेह्न्दा,

कहंदा सेमा तलवंडी वाला तहियो मौजा लेनदा,

हर साह नाल ध्यावे सदा खुशियाँ मनावे,

ओहदे जावा मैं रंगा तो बल्हारे,

शेरावाली डाटा वंड दी,

शेरावाली बेठी आप करे शेर ते सवारी नाल श्रधा दे टेकी जांदे मथा वारो वारी,

हाक मार के बुलाउंदे घुट सीने नाल लाउंदी दुःख भगता दे भोरा न सहारे,

शेरावाली डाटा वंड दी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।