लगियां रोनका माँ कटरे वाली दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लगियां रोनका माँ कटरे वाली दे

लगन जयकारे बई अज शेरावाली दे,

चढ़ के कठिन चडाईया संगता आइया ने,

संगता औन दियां अज लख वधाइया ने,

पल्ले भर जाने हर इक सवाली दे,

लगन जयकारे बई अज शेरावाली दे,

माँ दे नाम दी महिमा बड़ी प्यारी है,

बैठी गुफा ते करके शेर सवारी है,

सदके जाइए जी इस माँ कर्मा वाली दे,

लगन जयकारे बई अज शेरावाली दे,

राजू भी हरिपुरियां दर रे औंदा है,

तेरा सलीम दातिये भेटा गौंडा है,

लक्ष्मी सर्स्स्वती नाल माँ काली दे

लगन जयकारे बई अज शेरावाली दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।