मेरा गोपाल गिरधारी ज़माने से निराला है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरा गोपाल गिरधारी ज़माने से निराला है।

ना गोरा है ना कला है, वो मोहन मुरली वाला है॥

कभी सपनो में आ जाना, कभी रूपोश हो जाना।

यह तरसाने का मोहन ने निराला ढंग निकाला है॥

कभी वो रूठ जाता है, कभी वो मुस्कुराता है।

इसी दर्शन की खातिर तो बड़ी नाजो से पाला है॥

मज़े से दिल में आ बैठो, मेरे नैनो में बस जाओ।

अरे गोपाल मंदिर यह तुम्हारा देखा भाला है॥

कहीं उखल से बंद जाना, कही ग्वालो के संग आना।

तुम्हारी बाल लीला ने अजब धोखे में डाला है॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।