जोगी जोगी कहन गे जो पौनाहारी कहन गे

पारंपरिक
माँ गंगा भजन बाबा बालक नाथ भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

जोगी दा जो नाम लें सदा खुश रहन गे,

जोगी जोगी कहन गे जो पौनाहारी कहन गे,

झोली चिमटे सींगिया वाला माँ रत्नो दा पाली,

दर ते आइए संगता नु ओह कदे न मोड़े खाली

सच दस कदे भी गुनाहे न पैन गे,

जोगी जोगी कहन गे जो पौनाहारी कहन गे,

वन गंगा दे धुना लाके जेहड़े चौंकियाँ भरदे,

सिद्ध जोगी पौणाहारी दी जय जय कार जो कार्दे,

दुख दे सागरा च कदे भी न बेहन गे,

जोगी जोगी कहन गे जो पौनाहारी कहन गे,

चोहान साब पेचीती साहिल ते आ गया चेत दा चाला,

सिद्ध जोगी दे दर्शन करदा कर्म बागा वाला

मंजिला नु पौंदे जान पीछे न ओह रहन गे,

जोगी जोगी कहन गे जो पौनाहारी कहन गे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।