माँ दे हुकम बिना पता भी नहीं झुल्दा

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मंदरी जाके शीश जुका ले माँ दे नाम दी ज्योत जगा ले,

कर पछतावा भूल दा माँ दे हुकम बिना पता भी नहीं झुल्दा

मांग मिलदी है माँ तो मंगी,

पेरेदार भेरो बजरंगी,

दर ते पीपली माँ मेरी दे तारे बेडा कुल दा,

माँ दे हुकम बिना पता भी नहीं झुल्दा ,

मन तेरा क्यों डोले खावे बुलेया नु माँ चरनी लावे,

मेहर करे जद नैना देवी बंद भाग भी खुल्दा,

माँ दे हुकम बिना पता भी नहीं झुल्दा ,

नूर तू जाए पला गल पाके माँ तो झोली मुड़ी भरा के,

शेरावाली माँ दे दीनदी फल सेवा दे मूल दा,

माँ दे हुकम बिना पता भी नहीं झुल्दा ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।