जदो तेरे दर दा ख्याल उठ दा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जदो तेरे दर दा ख्याल उठ दा,

अमिये ने दिल च उबाल उठ दा,

तेरे दर उते आवा तनु हाल सुनावा

तरेया दरा ते आके करा सजदा,

जदो तेरे दर दा ख्याल उठ दा,

घर घर जगह जगह हों जगराते चेत असू वाले जदो आऊं नवराते,

सोहन दिया चालेया च चित करे आन नु.

दर आवा छड़ के ख्याल जग दा,

जदो तेरे दर दा ख्याल उठ दा,

हर साल दर ते बुलाया करि माँ ,

लिख लिख चिठिया तू पाया करि माँ,

आवा गे जरुरु जे तू बुलाएगी माँ,

करि तू नवेड़ा मेरे हर दुःख दा,

जदो तेरे दर दा ख्याल उठ दा,

आखड़ा राजेश मुख मोड़ी न,

जो भी आवे दर खाली मोड़ी न,

रहे तेरे नाम दी लगन लगी माँ,

हर पास तेरा ही नजारा दिखदा,

जदो तेरे दर दा ख्याल उठ दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।