सैयां मैनु तू दिसदा

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे दिल दे विच रेहँदी तेरी सूरत सैयां मैनु तू दिसदा,

रब दिसदा है ऐसी तेरी मूरत सैयां मैनु तू दिसदा,

किवे तेरी महिमा दा करा मैं बखान वे,

शब्द न कॉल मेरे चले नाग वां वे,

हर शेह दे विच दिसे तेरी सूरत ,

सैयां मैनु तू दिसदा,

दिसदे ने लोकि एथे मतलभी सारे,

एहना नु ही खुश करके सैया असि हारे

हूँ लगदे ने एह बदसूरत सैयां मैनु तू दिसदा,

तकदे ही तनु सैया चैन मैनु मिलिया कहन्दे ने तू जांदा है हाल मेरे दिल दा,

कर फिर क्यों मैं अरजा गुजारा सैयां मैनु तू दिसदा,

पिता मेरा तू ही सैयां माँ भी मेरी तू है ,

आके तेरे चरना च मिलदा सकूँ है,

बिन तेरे हूँ हुँदा न गुजारा सैयां मैनु तू दिसदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।