सुबह करीब है तारों का हाल क्या होगा

श्री गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुबह करीब है, तारों का हाल क्या होगा

सहर करीब है, तारों का हाल क्या होगा

अब इंतज़ार के मारो का हाल क्या होगा

तेरी निगह ने प्यारे कभी ये सोचा है

तेरी निगाह ने ज़ालिम कभी यह सोचा है

तेरी निगाह के मारों का हाल क्या होगा

जब से उन आँखों से ऑंखें मिली

हो गयी है तभी से ये बावरी ऑंखें

नहीं धीर धरे अति व्याकुल है

उठजाती है ये कुल कावेरी ऑंखें

कुछ जादू भरी कुछ भाव भरी,

उस सांवरे की है सांवरी ऑंखें

फिर से वह रूप दिखादे कोई

हो रही है बड़ी उतावली ऑंखें तेरी

ए मेरे पर्दा नाशी अब तो यह हटा पर्दा

तेरे दर्शन के दीवानो का हाल क्या होगा

मुकाबिला है तेरे हुस्न का बहारों से

न जाने आज बहारों का हाल क्या होगा

नकाब उनका उलटना तो चाहता हूँ मगर

बिगड़ गए तो नज़ारों का हाल क्या होगा

मूल रचना : सेहब अख्तर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।