में तो बालाजी का ख़ास पुजारी सु

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ओ जय जय श्री राम

ओ तो दाता स में बिखारी सु

में फक्कड सु अनाडी सु

मैं तो बालाजी का ख़ास पुजारी सु

उस की खातिर जप कर ल्यु

ओ तो दाता स में बिखारी सु

ओ तो दाता स में बिखारी सु

में तो बालाजी का ख़ास पुजारी सु

ओ तीन लोक का मालिक से

में मर्जी का खुद मालिक सु

जय जय श्री राम बोलो जय जय श्री राम

ओ तीन लोक का मालिक स

में मर्जी का खुद मालिक सु

दरबार तेरे आऊ में तो सु

में तो बालाजी का ख़ास पुजारी सु

मेरा बालाजी बड़ा भोला से

में भी दिल का बड़ा भोला सु

जय जय श्री राम बोलो जय जय श्री राम

मेरा बालाजी बड़ा भोला से

में भी दिल का बड़ा भोला सु

किरपा करी बाबा ने इनका आभारी सु

मेरा बालाजी बड़ा भोला से

में भी दिल का बड़ा भोला सु

यो सोनू कौशिक दास तेरा

से गाँव बुराड़ी ख़ास मेरा

जय जय श्री राम बोलो जय जय श्री राम

तेरा भक्त में ख़ास पर में परभारी सु

में तो बालाजी का ख़ास पुजारी सु

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।