तन पे सिंदूरी चोला हाथ में घोटा है

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

तन पे सिंदूरी चोला हाथ में घोटा है,

भरता भरता है भंडारे सब के संकट हरता है,

बोले राम जय श्री राम कहने लाल लंगोटा है,

तन पे सिंदूरी चोला हाथ में घोटा है,

जय जय कारे ढोल नगाड़े बाजे तेरे मंदिर में,

चड़े चूरमा भोग सब लागे तेरे मंदिर में

अपने भगतो के संग राम की धुन में नाचता होता है,

तन पे सिंदूरी चोला हाथ में घोटा है,

वार तिथि कोई भी हो द्वारे पे तेरे मेला है ,

नगर नगर और डगर डगर तेरे भगतो का रेला,

भागे अच्छे अच्छे भूत के ऐसा पड़े सोटा है,

तन पे सिंदूरी चोला हाथ में घोटा है,

ऐसा कुछ कर दे जीवन भर तेरे गुण गाऊ,

जब भी मेरा दिल चाहे दर्शन करने दौड़ा आउ

लेहरी झूम ख़ुशी से तू झूम ये मौका है,

तन पे सिंदूरी चोला हाथ में घोटा है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।