मेरी विनती यही है पौणाहारी

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॥ पावन पाठ ॥

मेरी विनती, यही है पौणाहारी/ दुधाधारी ll,

'कृपा बरसाए रखना',,बाबा ll

हे पौणाहारी ,,,,'कृपा बरसाए रखना' l

हे दुधाधारी,,, 'कृपा बरसाए रखना' l

हो,,मुझे 'तेरा ही सहारा पौणाहारी/ दुधाधारी ll,

चरणों से, लगाए रखना,,,

'कृपा बरसाए रखना' l

हे पौणाहारी ,,,,'कृपा बरसाए रखना' l

हे दुधाधारी,,, 'कृपा बरसाए रखना' l

मेरी विनती, यही है,,,,,,,,,,,,,,,,F

हो पौणाहारी, हो दुधाधारी,,,,,,llll

1-छोड दुनियाँ, के झूठे नाते सारे,

'मैं योगी तेरे, दर पे आ गया',,, ll

हे पौणाहारी,,,,'मैं योगी तेरे, दर पे आ गया',,, l

हे दुधाधारी,,,,'मैं योगी तेरे, दर पे आ गया',,, l

मैंने 'तुमको, पुकारा पौणाहारी/ दुधाधारी ll,

कि जग से, बचाए रखना,,,

'कृपा बरसाए रखना' l

हे पौणाहारी ,,,,'कृपा बरसाए रखना' l

हे दुधाधारी,,, 'कृपा बरसाए रखना' l

मेरी विनती, यही है,,,,,,,,,,,,,,,,F

हो पौणाहारी, हो दुधाधारी,,,,,,llll

2-इन स्वांसो, की माला पे मैं,

'सदा ही तेरा, नाम सिमरूं',,बाबा ll

हे पौणाहारी,,,,'सदा ही तेरा, नाम सिमरूं' l

हे दुधाधारी,,,,'सदा ही तेरा, नाम सिमरूं' l

लागी 'धूणे, चिमटे के नाम वाली ll,

लगन यह, लगाए रखना,,,

'कृपा बरसाए रखना' l

हे पौणाहारी ,,,,'कृपा बरसाए रखना' l

हे दुधाधारी,,, 'कृपा बरसाए रखना' l

मेरी विनती, यही है,,,,,,,,,,,,,,,,F

हो पौणाहारी,,,, हो दुधाधारी,,,,ll

3-तेरे नाम के, रंग में रंग के,

'मैं गुण गाऊँ, तेरी महिमा के',,बाबा ll

हे पौणाहारी,,,,'मैं गुण गाऊँ, तेरी महिमा के' l

हे दुधाधारी,,,,'मैं गुण गाऊँ, तेरी महिमा के'

कहे 'दास, यह तेरा पौणाहारी/ दुधाधारी ll,

दया बनाए रखना,,,

'कृपा बरसाए रखना' lll

हे पौणाहारी ,,,,'कृपा बरसाए रखना' l

हे दुधाधारी,,, 'कृपा बरसाए रखना' l

मेरी विनती, यही है,,,,,,,,,,,,,,,,F

हो पौणाहारी, हो दुधाधारी,,,,,,llll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।