दुनियां में सकराय के जैसा नहीं और कोई दरबार मिले

सौरभ मधुकर
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जय माँ रुद्राणी ब्रम्हाणी की !!

भक्तों ! राजस्थान की धरती पर एक ऐसा पावन पुण्य स्थान है , जहां माँ शाकम्भरी 'सौम्य अर्थात ब्रम्हाणी' एवं ' रूद्र अर्थात रुद्राणी ' के दिव्य दो रूपों में विराजमान हैं | धन्य है सकराय की धरती जहां माँ शाकम्भरी स्वरूपा "ब्रम्हाणी - रुद्राणी" के दर्शन होते हैं |

दुनियां में सकराय के जैसा नहीं और कोई दरबार मिले ,

इक माँ मिलती बड़ी मुश्किल से , यहां दो-दो माँ का प्यार मिले |

दुनियां में सकराय के जैसा नहीं और कोई दरबार मिले |

इक मेरी माँ ब्रम्हाणी है , दूजी मईया रुद्राणी है |

इक मेरी माँ ब्रम्हाणी है , दूजी मईया रुद्राणी है |

माँ तेरी शरण में आकर के हमें शाकम्भरी परिवार मिले |

भगतों की रक्षा करने को दो-दो चुनड़ी लहराती है ,

भगतों की रक्षा करने को दो-दो चुनड़ी लहराती है ,

दो-दो चुनड़ी के पल्ले से धन-दौलत का भण्डार मिले |

हे जगदम्बे तेरे दर्शन को शंकर त्रिपुरारी तरस रहे ,

हे जगदम्बे तेरे दर्शन को शंकर त्रिपुरारी तरस रहे ,

अहो भाग्य ये हम भगतो का है , यहाँ दो माँ का दीदार मिले |

इक माँ मिलती बड़ी मुश्किल से , यहां दो-दो माँ का प्यार मिले |

दुनियां में सकराय के जैसा नहीं और कोई दरबार मिले |

दुनियां में सकराय के जैसा नहीं और कोई दरबार मिले |

भजन गायक एवं मंगल पाठ वाचक - सौरभ मधुकर

संपर्क - 9830608619

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।