दीनबन्धु दीनानाथ मेरी तन हेरिये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दीनबन्धु दीनानाथ, मेरी तन हेरिये

भाई नाहिं, बन्धु नाहिं, कटुम-परिवार नाहिं

ऐसा कोई मीत नाहिं, जाके ढिंग जाइये

खेती नाहिं, बारी नाहिं, बनिज ब्योपार नाहिं

ऐसो कोउ साहु नाहिं जासों कछू माँगिये

कहत मलूकदास छोड़ि दे पराई आस,

राम धनी पाइकै अब काकी सरन जाइये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।