साई की नगरी परम् अति सुंदर

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

साई की नगरी परम् अति सुंदर जहाँ कोई जान न पावे

चाँद सूरज जहाँ पवन न पानी, को सन्देश पहुचावे

दर्द ये साईं को सुनावे .. .

आगे चलों पन्थ नही सूझे, पीछे दोष लगावे

केहि विधि ससुरे जाऊं मोरि सजनी बिरहा जोर जरावे

बिषय रस नाच नचावे ...

बिनु सद्गुरु अपनों नहीं कोऊ जो ये राह बतावे

कहत कबीर सुनो भाई साधो सुपनन पीतम पावे

तपन जो जिय की बुझावे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।